मैं एक छोटा सा बालक हुँ साईं

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॥ पावन पाठ ॥

मैं एक छोटा सा बालक हुँ साईं,

रस्ता शिर्डी का भुला हुआ हुँ ।

याद आती मुझे शिर्डी की,

इसलिए बाबा रोने लगा हुँ ॥

हर तरफ जुल्म हैं बेबसी हैं,

बेकरारी बड़ी बेकसी हैं ।

आप आकर के रस्ता दिखा दो,

मैं ज़माने में खोने लगा हुँ ॥

मेरे हालात पर अब करर्म कर,

मेरे साईं तू अपनी नज़र कर ।

गम की चादर को ओढे हुए मैं,

सर्द रातों में सोने लगा हुँ ॥

आपका ही सहारा हैं मुझको,

आपको ही पुकारूँगा मैं तो ।

पलकें भींगी है साईं ‘आशिष’ की,

आंसुओ में नहाने लगा हुँ ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।