जरा इतना बता दे कान्हा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जरा इतना बता दे कान्हा तेरा रंग काला क्यों

तू काला हो कर भी जग से निराला क्यों,

मैंने काली रात में जन्म लिया और काली गाये का दूध पिया,

मेरी कमली भी काली है इस लिए काला हु,

जरा इतना बता दे कान्हा तेरा रंग काला क्यों

तू काला हो कर भी जग से निराला क्यों,

मैंने काले नाग को नोच लिया और काले नाग पे नाच किया

नागो का रंग काला इसलिए काला हु,

जरा इतना बता दे कान्हा तेरा रंग काला क्यों

तू काला हो कर भी जग से निराला क्यों,

सखी रोज ही घर में बुलाती है और माखन बहुत खिलाती है,

सखियों का दिल काला इसलिए काला हु,

जरा इतना बता दे कान्हा तेरा रंग काला क्यों

तू काला हो कर भी जग से निराला क्यों,

सावन में बिजली कड़कती है और बादल भी बहुत बरसते है,

बदल का रंग काला,इसलिए काला हु,

जरा इतना बता दे कान्हा तेरा रंग काला क्यों

तू काला हो कर भी जग से निराला क्यों,

सखी नैनो में कजरा लगती है और नैनो में मुझको बिठाती है,

कजरे का रंग काला,इसी लिए काला हु,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।