साई देवा करूँ मैं तेरी सेवा

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॥ पावन पाठ ॥

साईं देवा करू मैं तेरी सेवा हमेशा तेरा दास बन के,

गुण गाऊ मैं शुकर मनाऊ हमेशा तेरा दास बन के,

सिर चरणों में तेरे प्रभु धर दू दिल जान कुर्बान तोपे करदू,

जींद वारु मैं नजर उतारू हमेशा तेरा दास बन के,

जब जब तेरी दीद हो दीदार हो जब जब सामने तू सरकार हो,

येही चाहू मैं उमर बिताऊ हमेशा तेरा दास बन के,

इक बार मोहे अपना तू बोल दे रस कानो में अमृत घोल दे,

जिया झूमे कदम तेरे चूमे हमेशा तेरा दास बन के,

गुण अवगुण तू मेरे भी बिसार से ,

मोहे बालक समज के तू प्यार दे,

माथा टेकू दुलार तेरा मांगू हमेशा तेरा दास बन के,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।