तेरी मटकन चटकन लटकन पे बलिहारी रे बलिहारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरी मटकन चटकन लटकन पे बलिहारी रे बलिहारी

तेरी टेडी मुस्कनिया पे मैं तो वारी रे मैं वारी,

तेरी मटकन चटकन लटकन पे बलिहारी रे बलिहारी

इक वार जो कान्हा तुझको देखे वो लूट जाए,

लूट कर भी वो बांके बिहारी बार बार बलि जाए ,

तेरी अलीकां काली काली पे बलिहारी रे बलिहारी,

तेरी टेडी मुस्कनिया पे मैं तो वारी रे मैं वारी,

तेरी मटकन चटकन लटकन पे बलिहारी रे बलिहारी

कंकण किन किन नूपुर की ध्वनि सुन सुन मन हर्षावे,

प्रेम लोक में प्रेम अवसरा मन मन में पश्तावे

तेरी नूरपुर की ध्वनि प्यारी पे बलिहारी रे बलिहारी,

तेरी टेडी मुस्कनिया पे मैं तो वारी रे मैं वारी,

तेरी मटकन चटकन लटकन पे बलिहारी रे बलिहारी

है कृष्ण हमारे सर्वस कहती ब्रिज नार नवेली

यमुना जी भी ब्रिज कट पर करती नित नियत खेली,

तेरी अलबेली सुरतिया पे बलिहारी रे बलिहारी

तेरी टेडी मुस्कनिया पे मैं तो वारी रे मैं वारी,

तेरी मटकन चटकन लटकन पे बलिहारी रे बलिहारी

तेरे होठ माथुर रसीले तिरशे नैना बड़ी कटीले

धुन अंगना रस खोले मैया पीछे पीछे ढोले

तेरी तोतरि बातन बोलणिया पे अभिनन्द बलिहारी,

तेरी टेडी मुस्कनिया पे मैं तो वारी रे मैं वारी,

तेरी मटकन चटकन लटकन पे बलिहारी रे बलिहारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।