कर्मण की गति न्यारी रे बिहारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कर्मण की गति न्यारी रे बिहारी कर्मण की गति न्यारी,

निर्मल नीर दये नदियां को सागर कर गई खारी रे,

रे बिहारी कर्मण की गति न्यारी,

उज्वल वर्ण दये बगुलन को कोयल कर गई कारी रे,

रे बिहारी कर्मण की गति न्यारी,

मुखर को तुम राज दियत हो ,

पंडित फिरत भिखारी रे बिहारी

कर्मण की गति न्यारी रे बिहारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।