भूलो न प्रभु याद रहे

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॥ पावन पाठ ॥

भूलो न भूलो न भूलो न प्रभु याद रहे,

सुख में रहे या दुःख में जैसा भी हाल होगा,

चाहे घर में हो गरीबी चाहे माला माल हो,

भूलो न भूलो न भूलो न प्रभु याद रहे,

रहते नहीं हमेशा दिन इक से किसी के,

दोनों तरफ से देखे दिन चार जिंदगी के,

भूलो न भूलो न भूलो न प्रभु याद रहे,

मिट ते है दुःख सारे भगवन की किरपा से,

मुश्क़िल आसान होये उस देव की किरपा से,

भूलो न भूलो न भूलो न प्रभु याद रहे,

मंजिल है दूर तेरी साथी उसे बना ले

भगवान तू अपने दिल में सदा वसा ले,

भूलो न भूलो न भूलो न प्रभु याद रहे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।