वृन्दावन जाना ए जरूर वे माहिआ

सर्व मोहन (टीनू सिंह)
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

लगदा नहीं जी मेरा घर बार सोहणेया वे

हो गयी हां मैं मजबूर वे माहिआ,

वृन्दावन जाना ए जरूर वे माहिआ

श्याम दे ख़यालां विच्च डूबी दिन रैन वे,

भूख प्यास मेरा खोया सुख चैन वे ।

मैनु ओहदा चड़ेया सरूर, वे माहिआ,

वृन्दावन जाना ए जरूर, वे माहिआ ॥

सस्स ननाण सारे ताने मेणे मारदे,

कर कर गल्लां मेरा तन मन साड़दे ।

गल्लां बन गईआं ने नासूर, वे माहिआ ,

वृन्दावन जाना ए जरूर वे माहिआ ॥

चन्ना, तेरी मेरी यह नाशवान गति मति ए,

बांके बिहारी मेरा सच्चा प्राण पति ए ।

नाता साडा जग दस्तूर, वे माहिआ,

वृन्दावन जाना ए जरूर वे माहिआ ॥

गल्ल बनदी नहिओ प्यार बिना...

दिल लगदा नहीं दिलदार बिना...

आखां ‘‘मधुप’ मैनु टोक ना वे सोहणेया,

वृन्दावन जानो मैनु रोक ना वे सोहणेया ।

मैं ता हो गयी ओहदे रंग नूरो नूर, वे माहिआ

वृन्दावन जाना ए जरूर वे माहिआ ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।