खेती करो रे हरी नाम की

संत कबीर
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रे मनवा खेती करो रे हरी नाम की,

हाथ नहीं लागे पैर नहीं लागे,

जीबिया न लागे मास की,

खेती करो रे हरी नाम की,

रुपया न लागे पैसा न लागे,

कोड़ी न लागे चढाम की,

खेती करो रे हरी नाम की,

बल नहीं लागे बैल नहीं लागे,

भूमि न लागे किसान की,

खेती करो रे हरी नाम की,

केहते कबीरा सुनो बाई साधू

बात कहु मैं तोहे काम की,

खेती करो रे हरी नाम की,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।