बीत गये दिन

संत कबीर
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॥ पावन पाठ ॥

बीत गये दिन भजन बिना रे,

भजन बिना रे भजन बिना रे,

बीत गये दिन भजन बिना रे,

बाल अवस्था खेल गवायो,

जब यौवन तब मान घना रे,

बीत गये दिन भजन बिना रे,

लाहे कारण मूल गावयो,

आ ज हु न गई रे मन की तृष्णा रे,

बीत गये दिन भजन बिना रे,

कहत कबीरा सुनो भाई साधू,

पार उत्तर गये रे संत जनो रे,

बीत गये दिन भजन बिना रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।