दिल से दिल भरके ना देखि मूर्ति सियाराम की

मीरा बाई
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

दिल से दिल भरके ना देखि मूर्ति सियाराम की

हर दिल के अंदर बसी है झांकी सियाराम की

भगत हो तो ऐसे हो जैसे है हनुमान जी

सीना फाड़ करके दिखाई मूर्ति सियाराम की

दिल से..........

भगत हो तो ऐसे हो जैसे है प्रह्लाद जी

कर्म खम्बे में दिखाई मूर्ति सियाराम की

दिल से..........

भगतन हो तो ऐसी हो जैसी मीराबाई जी

जहर को अमृत बनाया जय जय सीताराम की

दिल से.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।