आये यहाँ अकेले

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॥ पावन पाठ ॥

चंद दिन की है ये बहारे चंद दिन के है ये मेले,

आये याहा अकेले जाना भी है अकेले,

फिर क्यों उठाये तूने बेकार के झमेले,

साईं का नाम लेले साईं का नाम लेले,

जीवन में मौज दरिया इस का नही है ठिकाना

आया जो इस जहां में इक रोज उसको जाना,

बस सास आखिरी हो छुटे गे जग के रेले,

साईं का नाम लेले साईं का नाम लेले,

आया था जब जहां में दोनों ये हाथ खाली,

तूने जमाने भर की क्यों जिलते उठा ली,

सब छोड़ के है जाना इतने भी खेल खेले

साईं का नाम लेले साईं का नाम लेले,

केवल जन्म ये हीरा मिलता नही दोबरा,

साईं चरण में आजा मिल जाएगा सहारा,

सिर पे हजारो सदमे बेकार तूने झेले,

साईं का नाम लेले साईं का नाम लेले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।