गम के मरे हम दुखियारे

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॥ पावन पाठ ॥

गम के मारे हम दुखायारे सारे रे सारे रे,

घर से निकले मज़बूरी में हम मजदुर वेचारे

गम के मारे हम दुखायारे सारे रे सारे रे,

पैदल ही पैदल चल कर है जाना,

दूर बहुत मंजिल है दूर ठिकाना,

घर विज्वादों हम को हम है वक़्त के मारे ,

गम के मारे हम दुखायारे सारे रे सारे रे,

रोजी रोटी के बी पड़े अब लाले,

छोटे छोटे बचो को अब कौन सम्बाले,

छुटा मज़बूरी का घर रोते नैन हमारे,

गम के मारे हम दुखायारे सारे रे सारे रे,

कितनो ने अपने है प्राण गवाए,

घर तक जाने का यत्न कौई न पाए,

बिछड़ गए परिवारों से नगर रो रो पुकारे,

गम के मारे हम दुखायारे सारे रे सारे रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।