नाचू रे मैं तो ओड चुनरियाँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जमके ढोल बजा मेरे ढोली नच नच के मेरे साथ,

बड़े नसीबो से आई आज ये जगराते की रात,

नाचू रे मैं तो ओड चुनरियाँ तभी तो माँ की पड़ गी नजरियां,

तन झूमे मन लिए हिचकोले जिया मेरा ढोले,

नाचन दे जी भर के आज ये दिल दीवाना बोले,

किस्मत से मेरी आज हुई है मैया से मुलाक़ात,

नाचू रे मैं तो ओड चुनरियाँ तभी तो माँ की पड़ गी नजरियां,

रोज रोज आये ना ऐसी रात मुरादों वाली,

ये तो भरोसा है मेरी मैया भरेगी झोली खाली,

सुनती सदा माँ शेरोवाली सब के मन की बात,

नाचू रे मैं तो ओड चुनरियाँ तभी तो माँ की पड़ गी नजरियां,

कैसे मनेगी मैया मेरी ये तो मैं न जानू,

टूट जाए चाहे सांसो के घुंघरू माँ को मना के मानु,

कब तक नहीं धरो गी मैया मेरे सिर पे हाथ,

नाचू रे मैं तो ओड चुनरियाँ तभी तो माँ की पड़ गी नजरियां,

बड़े बड़े राजे माहराजे नाचे माँ के आगे

जो न नाचे माँ के जागे में उसका नसीबा जागे,

करती माँ उसके जीवन में खुशियों की बरसात,

नाचू रे मैं तो ओड चुनरियाँ तभी तो माँ की पड़ गी नजरियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।