मेरी मां लाजवाब

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी मां लाजवाब मेरी मां लाजवाब

मेरी मां लाजवाब मेरी मां लाजवाब

ना कलम ना कोई किताब ना रखती कोई हिसाब

सब भक्तों को देती है, सब भक्तों को देती हैं

मां रानी बेहिसाब

मेरी मां लाजवाब, मेरी मां लाजवाब

मेरी मां लाजवाब, मेरी मां लाजवाब

आज क्या मांगा कल क्या मांगा मेरा चिट्ठा मेरे पास

मेरा चिट्ठा मेरे पास

देकर सब कुछ भूल जाती बात हैं ऐसी खास

मां में बात हैं ऐसी खास

आज क्या मांगा कल क्या मेरा चिट्ठा मेरे पास

देकर सब कुछ भूल जाती बात हैं ऐसी मां में खास

जीवन में हो जितने कांटे, जीवन में हो जितने कांटे

कर देती मां गुलाब

मेरी मां लाजवाब मेरी मां लाजवाब

मेरी मां लाजवाब मेरी मां लाजवाब

ना ही आता जोड़ घटाना ना ही गुणा ना भाग

ना ही गुणा ना भाग

दिल खोलकर लुटाए खजाना पूरी करती मुराद

मां पूरी करती मुराद

ना ही आता जोड़ घटाना ना ही गुणा ना भाग

दिल खोलकर लुटाए खजाना पूरी करती मुराद

पल में ही संवार देती, पल में ही संवार देती

सारे मैया ख्वाब

मेरी मां लाजवाब मेरी मां लाजवाब

मेरी मां लाजवाब मेरी मां लाजवाब

ना ही मांगे कोई जवाब ना करती कोई सवाल

ना करती कोई सवाल

बिन बोले ही भर देती खुशियों के मां भंडार

खुशियों के मां भंडार

ना ही मांगे कोई जवाब ना करती कोई सवाल

बिन बोले ही भर देती खुशियों के भंडार

कीर्ति को भक्ति का दे दो, कीर्ति को भक्ति का दे दो

तोहफा तुम नायाब

मेरी मां लाजवाब मेरी मां लाजवाब

मेरी मां लाजवाब मेरी मां लाजवाब

ना कलम ना कोई किताब ना रखती कोई हिसाब

सब भक्तों को देती हैं सब भक्तों को देती हैं

मां रानी बेहिसाब

मेरी मां लाजवाब मेरी मां लाजवाब

मेरी मां लाजवाब मेरी मां लाजवाब

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।