मैं पाप का पुतला हु

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं पाप का पुतला हु तू दया की मूरत है,

मैं याचक तू दानी मुझे तेरी जररूत है,

मैं पाप का पुतला हु तू दया की मूरत है,

संसार कहु दाता माया में लिपटा हु,

पग पग पे कपट करू पापो में उलझा हु,

मैं भूल गया चलती याहा तेरी अदालत है,

मैं पाप का पुतला हु तू दया की मूरत है,

तू हाकिम मैं मुजरिम कर माफ़ गुन्हा मेरे,

इस बार बरी कर दे लो शरण पड़ा तेरे,

फरयादी को मिलती याहा तेरी इनायत है,

मैं पाप का पुतला हु तू दया की मूरत है,

हे दीं बंधू मेरी कर माफ़ खता प्रभुवर,

ले हर्ष पकड़ बाहे आ गे का रस्ता कर,

इस दीं की हस्ती तो याहा तेरी बदौलत है,

मैं पाप का पुतला हु तू दया की मूरत है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।