मेरा नाथ रूस गया है कोई जा ओहनू मनावे

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॥ पावन पाठ ॥

मेरा नाथ रूस गया है कोई जा ओहनू मनावे

मेरा पीर रूस गया है कोई जा ओहनू मनावे,

ओहने बूहे धो ले दर दे ते दीदार न करावे,

मेरा नाथ रूस गया है कोई जा ओहनू मनावे

ओहनू जाके कोई आखो मैनु नींद नाहियो आउंदी,

ओह्दी याद दी हनेरी दिन रात है जगाउंदी,

अखा नाल दिल भी रोवे दिल चैन भी न पावे,

मेरा नाथ रूस गया है कोई जा ओहनू मनावे

तू दिन वार भी लंगाये ऐतवार भी लंगाये

तनु देख्या नहीं कद दा तू त्यौहार भी लंगाये,

तेरा नाम लै लै रोवा तनु क्यों तरस ना आवे,

मेरा नाथ रूस गया है कोई जा ओहनू मनावे

जे खफा नहीं तू साथो फिर खोल दे द्वारे,

तनु प्यार जो ने करदे दर आऊं ओह प्यारे,

गौतम जेहा भी पापी दीदार आके पावे

मेरा नाथ रूस गया है कोई जा ओहनू मनावे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।