मेनू दे वरदान भवानिए तेरा शृंगार करावा

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेनू दे वरदान भवानिए तेरा शृंगार करावा

तेनु लाल चूड़ियाँ पावा, लाला दे हार पहनावां

नक विच नथनी कन विच कुंडल सिर ते मुकुट सजावा

पैरा दे विच पा झांजरा नच नच तेनु मनावा

अपने हथा गोर हत्था मेहँदी मैं लावा

गल विच चोला लाल गुलाबी विच सोने दिया तारा

माथे दे ठीके दिया चार दूर लश्कर

चुनी उते हिरे मोती, की मैं चादर चढ़ावा

शेर तेरा अलबेला दतिया जो रह जाये खाली

उस दी गर्दन दे विच पावा पटी गुंगरुआ वाली

सारी दुनिया देखे बचड़े किवें सजांदे माँवां

छपन भोग बनाके दतिया तेरा दर ते लिआवा

तू खावे मैं टूक टूक देखा तेरा शुक्र मनावा

भगता नु तू जो कुछ दिता, मैं तेरे लेखे लावा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।