राह दिखा दो हे भगवन्

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॥ पावन पाठ ॥

मन द्विविधा में है भटक रहा स्नमार्ग दिखा दो हे भगवन्,

सत्कर्म और अपनी भक्ति की राह दिखा दो हे भगवन्,

तुम जगत् नियंता और रचयिता हो सारी सृष्टि के।

मैं अज्ञानी हूं दुनियां में तुम कठिन परीक्षा लेते हो॥

इस भवबंधन के लोभ मोह कष्टों से कैसे मुक्ति मिले।

तेरी लीला तूं ही जाने हम शरण तिहारी हे भगवन्॥

प्रभु तुम तो अंतर्यामी हो हर बात जानते हो मन की।

व्याकुलता और व्यग्रता अब सुलझा दो हे भगवन् ॥

अर्द्धचंद्रधारी त्रिपाठी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।