देवा साई देवा देवा साई देवा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मेरी जिंदगी में देखो क्या कमाल हो गया

मेरी जिंगदी का साई हम राज हो गया

मेरा देवा मेरा साई मेरा यार हो गया.

देवा साई देवा देवा साई देवा

हसता ये चेहरा तेरा जीने का सबब है

मेरी पहेली का तू ही अब हल है,

दुनिया ने दिए चाहे कितने जखम है,

तूने ही आके थामा मुझे हम दम है ,

जब से थामा है साई तूने मेरा हाथ है,

मेरे जीने का तू सहारा हो गया,

देवा साई देवा देवा साई देवा

दोस्ती का तूने साथ यु निभाया,

कमियों को मेरी अपने सीने से लगाया,

जब भी गिरा मैं तूने पकड़ के उठाया,

बन के हम दर्द मेरा साथ निभाया,

जब से है पाया मैंने साई तेरा साथ है होंसला मेरा बुलंद हो गया ,

देवा साई देवा देवा साई देवा

सागर से कह रहा अपना रिश्ता साई,

तू ही हबीब मेरा तू ही मेरा भाई,

जाएगा नसीब मेरा पाके तुझे साई,

तेरी रेहमत ने हर बिगड़ी बनाई,

जब से फैलाया तेरा दर पे ये हाथ है खुशियों से मेरा भंडार भर गया

देवा साई देवा देवा साई देवा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।