भोले नाम के मोती

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले नाम के मोती तू पिरोए जा, तेरा लागेगा क्या गया मूल वे,

भोले नाम के मोती तू पिरोए जा, तेरा लागेगा क्या गया मूल वे,

क्या लागेगा मूल तेरा, क्या लागेगा मूल वे,

हर पल गुण तू गाए जा, तेरा क्या लागेगा मूल वे,

भोले नाम के मोती ..

जो घटना को होना वो तो होकर ही रहती है,

घटना को पल मे भुलाए जा, तेरा क्या लागेगा मूल वे

भोले नाम के मोती..

शिव नाम की अमृत-२ वाणी , भोले नाम की अमृत-२ वाणी,

पढ़ पढ़ के कष्ट मिटाए जा, तेरा क्या लागेगा मूल वे,

भोले नाम के मोती …,

हर पल तेरे साथ है भोले ,हर पल तेरे संग मे है भोले गुण ,

इनका तो तू भी गाए जा, तेरा क्या लागेगा मूल वे....२,

भोले नाम के मोती तू पिरोए जा

रोहित तेरी महिमा है गाए ,संग मे भोले शीश निवाये,

कृपा ऐसे ही मुझ पे भरसाये जा ,तेरा क्या लागे गया मूल वे ,

भोले नाम के मोती तू पिरोए जा,

Mere damaroo vale baba & Tera kisne kiya Shingar

Written By Rohit Jain (Punjab)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।