कैसा लगा गोरा कैलाशा दा बसना

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कैसा लगा गोरा कैलाशा दा बसना,

सांजो भी कैलाशा अपने पास रखना,

तेरे मणिमहेशा कबूरत बोल दे,

भगत प्यारेया दे मन डोल दे,

कैसा लगा गोरा कैलाशा दा बसना,

भगत प्यारे तेरे सच बोलदे,

बुरा नहीं कहलानदे शम्भू मीठा बोलदे

कैसा लगा गोरा कैलाशा दा बसना,

गोरा तेरे मणिमहिषा मेले लगदे ,

ढोल शहनाई से नगाड़े भजदे

कैसा लगा गोरा कैलाशा दा बसना,

गुरमुख नाल भगतो नाता जोड़िये ,

मन मुख नाल अपना नाता तोड़िये,

कैसा लगा गोरा कैलाशा दा बसना,

खाली हथ आया बंदे खाली हथ जाना,

सुरिंदर पनियारी सब तू एह रहना,

कैसा लगा गोरा कैलाशा दा बसना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।