माये नि बड़ा डर लगदा ऐ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ये कैसी अजब बिमारी है जिहने पट ली दुनिया सारी ऐ,

तनु आउना पैना हूँ माये बचैया ने हिमत हारी है

सच दसिये ते हूँ जेल जेहा घर लगदा है,

माये नि बड़ा डर लगदा ऐ,

मंदिर तेरे आके हाल सुना नहीं सकदे,

परदेशी मुड़ के वतना नु जा नहीं सकदे,

भेन भरा दे घर फेरा पा नहीं सकदे,

दुःख किसे दा जाके आज वन्दा नहीं सकदे,

कदे नहीं लुकना एह सोचा दा सफर लगदा है,

माये नि बड़ा डर लगदा ऐ,

कई विचारे रहा दे विच रूल गए ने,

हंजू बन के खाब किसे दे डुल गए ने,

भेद नसीबा वाले सारे खुल गए ने,

रोटी किस दिन खादी सी सब भूल गए ने,

कईया दा ते सडका ते बिस्तर लगदा है,

माये नि बड़ा डर लगदा ऐ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।