एक दाता भगवान् है जग में

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॥ पावन पाठ ॥

एक दाता भगवान् है जग में एक दाता भगवान्,

छोटा सा दान कर के तू प्राणी काहे करे अभिमान,

एक दाता भगवान् है जग में एक दाता भगवान्,

सब तो मिला है प्रभु से तुझको फिर भी है तू अनजान,

छोटा सा दान कर के तू प्राणी काहे करे अभिमान,

एक दाता भगवान् है जग में एक दाता भगवान्,

तुझको मानुष तन दे प्रभु ने दे दिया जीवन दान,

छोटा सा दान कर के तू प्राणी काहे करे अभिमान,

एक दाता भगवान् है जग में एक दाता भगवान्,

प्रभु का ये धन तू कहे अपना कैसा है तू इंसान

छोटा सा दान कर के तू प्राणी काहे करे अभिमान,

एक दाता भगवान् है जग में एक दाता भगवान्,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।