मेरा रोम रोम नित बोले शिव बोले

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरा रोम रोम नित बोले शिव बोले,

मन शिव भगति में डोले शिव भोले शिव भोले,

मेरा रोम रोम नित बोले शिव बोले,

अलख जगाये धुनि रमाये शिव भोले भंडारी,

तीन लोक के स्वामी तेरी लीला सब से न्यारी,

हे सुख कारी तुम भोले शिव भोले,

मन शिव भगति में डोले शिव भोले शिव भोले,

मेरा रोम रोम नित बोले शिव बोले,

धृ त्रिशूल गल मुंड की माला ,

भाल चन्द्रमा सोहे निराला,

पारवती माँ संग में विराजे गोद विराजे गणपत लाला,

फिर देख के मनवा ढोले शिव भोले,

मन शिव भगति में डोले शिव भोले शिव भोले,

मेरा रोम रोम नित बोले शिव बोले,

दीं दुखी के तुम ही साहरे सारे जग के पालनहारे,

दर्श दिखाओ बिगड़ी बनाओ ाँ पड़ी है तेरे द्वारे,

हे नटनागर तुम भोले शिव भोले,

मन शिव भगति में डोले शिव भोले शिव भोले,

मेरा रोम रोम नित बोले शिव बोले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।