कृष्ण मुरारी हे गिरधारी वनवारी गोपाल हरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कृष्ण मुरारी हे गिरधारी वनवारी गोपाल हरे

जय सीता राम सीता राम सीता राम सीता राम सीता सीता राम हारे,

जय राधे श्याम राधे श्याम राधे श्याम राधे राधे राधे श्याम हरे,

नारायण का नाम सुमर नर कभी बुलाना ना चाहिए,

पा कर मानुष तन दुनिया में व्यर्थ गवाना ना चाहिए,

जय सीता राम सीता राम सीता राम सीता राम सीता सीता राम हारे,

जय राधे श्याम राधे श्याम राधे श्याम राधे राधे राधे श्याम हरे,

भज गोविन्दम भज गोविन्दम गोविन्दम भज मुद मते,

केशव माधव दीं दयाला कृष्णा कृष्णा हरे हरे,

जय सीता राम सीता राम सीता राम सीता राम सीता सीता राम हारे,

जय राधे श्याम राधे श्याम राधे श्याम राधे राधे राधे श्याम हरे,

मानुष जन्म है अनमोल बंदे व्यर्थ गवाना ना चाहिए,

नाम जपे से भव तर जाए इसे बुलाना ना चाहिए,

जय सीता राम सीता राम सीता राम सीता राम सीता सीता राम हारे,

जय राधे श्याम राधे श्याम राधे श्याम राधे राधे राधे श्याम हरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।