श्याम नाम रस पी ले मनवा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम नाम रस पी ले मनवा बून्द बून्द गुणकारी है,

कितने पी कर अम्र हो गए इस रस के बलिहारी है,

श्याम नाम रस पी ले मनवा बून्द बून्द गुणकारी है,

ये अनमोल रसायन है जो पैसो से नहीं दीखता है,

दुनिया के बाजारों में ये ढूंढे से नहीं मिलता है,

प्रेम तराजू तोल के देता सांवरियां व्यपारी है

कितने पी कर अम्र हो गए इस रस के बलिहारी है,

श्याम सुदा का स्वाद निराला पीता किस्मत वाला है

हो जाता पी कर मत वाला ये एसी मधुशाला है

दिन दुनि रात चौगनी बढ़ती रहे खुमारी रे

कितने पी कर अम्र हो गए इस रस के बलिहारी है,

जिसने ये रस पान किया है चमका भगये सितारा है,

जी भर के पीया करो ये तो अमृत की धारा है ,

बिन्नू जो पीते है उनकी शाम प्रभु से यारी है,

कितने पी कर अम्र हो गए इस रस के बलिहारी है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।