श्री सतगुरु के प्रेमी मंजिल से ना घबराना

स्वामी भुवनेश्वरी देवी जी महाराज
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॥ पावन पाठ ॥

श्री सतगुरु के प्रेमी मंजिल से ना घबराना,

दिन रात नाम का तू सुमिरन करते जाना ।

दुनिया के भोग तुझको मंजिल से गिराएंगे

दुनिया के लोग तुझको दीवाना बताएँगे ।

बातो में नहीं आना, पग पग बढ़ते जाना,

श्री सतगुरु के प्रेमी मंजिल से ना घबराना ॥

यह तेरा मुकद्दर था, तुझे पूर्ण संत मिले,

जीवन की बगिया में भक्ति के फूल खिले ।

हरी नाम से तुम अपनी झोली भरते जाना

श्री सतगुरु के प्रेमी मंजिल से ना घबराना ॥

प्रभु रूठे गुरु राखे, गुरु रूठे ठौर नहीं,

गुरु सेवक का रिश्ता, रिश्ता कोई और नहीं ।

इस रिश्ते को मनवा मुख्य कर के जाना,

श्री सतगुरु के प्रेमी मंजिल से ना घबराना ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।