कान्हा मोहे ऐसो बनाइये मोर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा मोहे ऐसो बनाइये मोर

नाचू ता ता थई थई ,

नाचू थई थई मैं नाचू ता ता थई थई

कान्हा मोहे ऐसो बनाइये मोर

मोर जो बनावे तो एसो बणायो,

अपनी ही रास रसीला में नचियो

सब देखे में और नाचू ता ता थई थई

कान्हा मोहे ऐसो बनाइये मोर

दही तू बनइयो चाहे दूध बनइयो

दान घाटी पे तू मोहे चडीयो,

हो राजी चित चोर,नाचू ता ता थई थई

कान्हा मोहे ऐसो बनाइये मोर

टर्की बण्यो चाहे पतंग बनियो,

वृन्दावन चाहे गोकुल में उड़ाइयो.

रख अपने हाथ में डोर नाचू ता ता थई थई

कान्हा मोहे ऐसो बनाइये मोर

शहनाई बनियो चाहे मुरली बनियो,

अपने ही अधरों पे मुझे सजियो,

जब हो मुरली का शोर नाचू ता ता थई थई

कान्हा मोहे ऐसो बनाइये मोर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।