देती है सहारा दुखियो को माँ त्रिकूट पर्वत वाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

देती है सहारा दुखियो को माँ त्रिकूट पर्वत वाली,

माँ वैष्णो जग कल्याणी भर्ती है झोली खाली,

देती है सहारा दुखियो को माँ त्रिकूट पर्वत वाली,

दुःख सब के वो हरती है सब का मंगल करती,

भर्ती सब का भण्डार माँ त्रिकूट पर्वत वाली,

देती है सहारा दुखियो को माँ त्रिकूट पर्वत वाली,

श्रद्धा से जो भी जावे वो मन चाहा फल पावे,

संकट से देती तार है माँ त्रिकूट पर्वत वाली,

देती है सहारा दुखियो को माँ त्रिकूट पर्वत वाली,

अमृता शरण में आवे श्रदा के पुष्प चढ़ावे,

शिवांशु शरण में आवे बल बुद्धि माँ से पावे ,

सुन लो माँ मेरी पुकार है माँ त्रिकूट पर्वत वाली,

देती है सहारा दुखियो को माँ त्रिकूट पर्वत वाली,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।