दिल करता माँ के रूप को देखु मैं सुबह शाम

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दिल करता माँ के रूप को देखु मैं सुबह शाम,

आँखों में माँ ही माँ हो होठो पे माँ का नाम,

दिल करता माँ के रूप को देखु मैं सुबह शाम,

माँ शेर पे चढ़ी हो आँखों में प्यार हो,

सिर पे मुकट गले में मोती का हार हो,

इक हाथ चक्र धारे इक हाथ शंख हो,

इक हाथ खडग दूजे कर में बुजंग हो,

खिलता कमल लिए हो,शृंगार सब किये हो,

देखु मैं सुबह शाम आँखों में माँ ही माँ हो,

होठो पे माँ का नाम,

दिल करता माँ के रूप को देखु मैं सुबह शाम,

भागे बुरी बलाये मैया के संख से सब कष्ट नष्ट होते माँ के बुजंग से,

दे छोड़ पीछा माया मैया के चाकर से बच जाए जीव जग में सारे तू चक्र से,

माँ खडग जब उठाये दुःख पास भी ना आये सुख देता मन का काम ,

आँखों में माँ ही माँ हो होठो में पा का नाम,

दिल करता माँ के रूप को देखु मैं सुबह शाम,

लागि रहे लगन मैया की धुन में हर दम ये मन रहे मगन,

मेरे हिरदये में ज्योति माँ की जला करे माँ है जगत की माता सब का भला करे,

विनती यही है माँ से जाऊ मैं जब झा से पाउ मैं माँ का धाम,

आँखों में माँ ही माँ हो होठो में पा का नाम,

दिल करता माँ के रूप को देखु मैं सुबह शाम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।