सोहने फुला वे गुलाब दिया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

सोहने फुला वे गुलाब दिया,

किथे तनु सांभ के रखा मेरे गुरा दे भाग दिया,

सोहने फुला वे गुलाब दिया,

कोठे ते का बोले चिठ्ठी आई मेरे गुरा दी

विच संगत दा नाम बोले

सोहने फुला वे गुलाब दिया,

इस बेड़ी दा मला कोई न चरना च रखी मालका,

इस दम दा वसा कोई न,

सोहने फुला वे गुलाब दिया,

आटा गुण नि आ हाथ धो के साडे घर आओ गुरु जी दुःख दस्नी आ रो रो के,

सोहने फुला वे गुलाब दिया,

बुहा पलका दा धोवन दे,

गुनाह दा मैं भरी आ लग चरना न रोवण दे,

सोहने फुला वे गुलाब दिया,

रहे भुलैया नु पा दिता,

तेरे विचो रब वेख्या तनु सजदा मैं ता किता

सोहने फुला वे गुलाब दिया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।