आजा नंद के दुलारे रोवे अकेली मीरा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आजा नंद के दुलारे, रोवे अकेली मीरा

बालक सी न ब्याह करवाया, तेरे संग मैं ब्याही हो..हो..

पिहर छोड़ सासरे आगी, लदी कुलक शाही हो..हो..

धोवे अकेली मीरा, आजा नंद के दुलारे हो..हो..॥

रोम रोम मे रमैया होया से, नही रोम ते न्यारा हो

दुष्टों का संघार करेया, बन्यां भक्तो का तू प्यारा हो..

जंग जोवे अकेली मीरा, आजा नंद के दुलारे हो..हो..॥

आदम देह के चोले के संग, दूत रहें सयम के हो.. हो..

सतरंग सेज बिछा राखी से, लगे गाळीचे गम के हो..हो.. ॥

सोवे अकेली मीरा, आजा नंद के दुलारे हो..हो..॥

‘माँगेराम’ राम ने टोहेवे, कोन्यों पाया दर पे हो..हो..

‘लख़मिचंद’ सुरग मे जालिये, फेर भी बोझा सिर पे हो..हो..॥

ढोवे अकेली मीरा, आजा नंद के दुलारे हो..हो..॥

Lyrics: Lt Pandit Sh. Mange Ram Sangi Ji, Panchi, Haryana

Lead Singer: Vidhi Deshwal

Chorus: Rinku, Muskan, Manisha, Sheetal, Isha

Music: Sh. Somesh Jangra ji, Hisar, Haryana

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।