कर किरपा शेरोवाली रखले अपने सरवेंट मुझे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कर किरपा शेरोवाली रखले अपने सरवेंट मुझे,

सेवा अपने भवनों की देदे माँ परमानेंट मुझे,

कर किरपा शेरोवाली रखले अपने सरवेंट मुझे,

गंगा से जल भर लाऊंगा उठ कर रोज सवेरे,

अस्नान करा कर पहनाऊगा फूलो के माँ सेहरे,

जन्मो के लिए करना है माँ आज ये एग्रीमेंट मुझे,

कर किरपा शेरोवाली रखले अपने सरवेंट मुझे,

इक बार सेवा का मौका देके देख मैया,

खुश हो जाएगा दिल तेरा सुन ओ जगत रचियाँ,

इक पलने में बिठा दूंगा कोई काम बता अर्जेंट मुझे,

कर किरपा शेरोवाली रखले अपने सरवेंट मुझे,

तेरे चरणो में गुजरेगी मेरी उम्र माँ सारी,

मुझे मिलेगी ममता तेरी तुझको तेरा पुजारी,

तू ना नहीं करेगी दाती विश्वाश है सो परसेंट मुझे

कर किरपा शेरोवाली रखले अपने सरवेंट मुझे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।