न धुप रहनी न छा बन्देया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

न धुप रहनी न छा बन्देया

न पयों रेहना न माँ बन्देया

हर शेह ने आखिर मूक जाना इक लेना रब दा नाम बन्देया,

न धुप रहनी न छा बन्देया

तू मुह चो रब रब करदा है कदी धुर अन्दरो भी करया कर,

जो वाणी दे विच लिखिया है तू अम्ल ओहदे ते करया कर,

कुल तीन हथ तेरी था बन्देया ,

हर शेह ने आखिर मूक जाना इक लेना रब दा नाम बन्देया,

न धुप रहनी न छा बन्देया

जो फूल सवेरे खीड दे ने ओह श्यामा नु मुर्जा जांदे,

एह दावे वादे सब बन्देया दो पल विच होंड मिटा जांदे,

तू मेनू मार मुका बन्देया,

हर शेह ने आखिर मूक जाना इक लेना रब दा नाम बन्देया,

न धुप रहनी न छा बन्देया

अज मिटटी पैरा थले है कल मिटटी हेठा तू होना,

जद पता है सब ने तुर जाना फिर काहदे लई रोना धोना,

उडीक दिया कबरा बन्देया,

हर शेह ने आखिर मूक जाना इक लेना रब दा नाम बन्देया,

न धुप रहनी न छा बन्देया

समशेर ये मंजिल पौनी है ता लग जा गुरा दे चरने,

तेरे कष्ट रोग सब मुकन गे सब मूक जाउगी धरनी,

तू जप ले गुरा दा नाम बन्देया,

हर शेह ने आखिर मूक जाना इक लेना रब दा नाम बन्देया,

न धुप रहनी न छा बन्देया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।