नवे साल दियां नवियाँ खुशिया

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

नवे साल दियां नवियाँ खुशिया गुरु जी दे दरबार दियां.

झोलियाँ भरिये रेहमता लइए ओ सची सरकार दियां,

कोई न खाली जाए गुरु जी दर तेरे ते आके,

भर जन्दी खाली झोलियाँ प्यार तेरा है पाके,

नवे साल दियां नवियाँ खुशिया गुरु जी दे दरबार दियां.

सब दे दुःख हरो मेरे गुरु जी सब दे कष्ट निवारो,

संगता आइय दुरो चल के सबना नु तुसी तारो,

नवे साल दियां नवियाँ खुशिया गुरु जी दे दरबार दियां.

बड़े मंदिर दी शोभा व जिथे चमके किस्मत सब दी,

अर्ज करे रविंदर तहाणु भुला बक्शो जग दी,

नवे साल दियां नवियाँ खुशिया गुरु जी दे दरबार दियां.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।