ऐसी दया करो महाराज

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

ऐसी दया करो महाराज नाम न विसरे नाम न विसरे,

नाम न विसरे नाम न विसरे,

बिन तुद होर जे मंगना सिर दुखा के दुःख,

दे नाम संतोखियाँ उतरे मन की भूख,

नाम न विसरे नाम न विसरे...

विसरे ना ही दातार अपना नाम देहो,

अपना नाम देहो गुरु जी,

गुण गावा दिन रात नानक चाहो एहो,

नाम न विसरे नाम न विसरे,...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।