सोने वाले जाग जा संसार मुसाफिर खाना है

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

किस धुन में बेठा वन्वारे तू किस मध में मस्ताना है,

सोने वाले जाग जा संसार मुसाफिर खाना है,

क्या लेकर के आया था जग में फिर क्या लेकर जाएगा,

मुठी बांधे आया जग में हाथ पसारे जाना है,

सोने वाले जाग जा संसार मुसाफिर खाना है,

कोई आज गया कोई कल गया कोई चंद रोज में जायेगा

जिस घर से निकल गया पंशी उस घर में फिर नही आना है,

सोने वाले जाग जा संसार मुसाफिर खाना है,

सूत मात पिता बांदव नारी धन धान यही रह जाएगा,

यह चंद रोज की यारी है फिर अपना कौन बेगाना है,

सोने वाले जाग जा संसार मुसाफिर खाना है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।