प्रभु तेरी शोभा नजर आये

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॥ पावन पाठ ॥

प्रभु तेरी शोभा नजर आये झील मिलाये,

तो जिन्दगी हो जाए सफल,

प्रभु तू मिले अगर स्मित बहाए कुछ सुनाये,

तो बन्दगी हो जाए सफल,

छत्र सिर पे ढलके तेज झल झल झलके

मोती मणि हार लटके ध्वल किरने झलके,

त्रिभुन स्वामी ये झ्ताये नैन पाए तो जिन्दगी हो जाए सफल

प्रभु तेरी शोभा नजर आये झील मिलाये,

तो जिन्दगी हो जाए सफल,

जो मेध छाया में जो वृक्ष छाया में,

ठंडक नही वो है प्रभु जी है तेरी छत्र छाया में,

तू जो मेरे सिर पे नाथ छाए साथ आये तो बंदगी हो जाए सफल,

प्रभु तेरी शोभा नजर आये झील मिलाये,

तो जिन्दगी हो जाए सफल,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।