मेरी जीवन नैया डोल रही मेरी जीवन नैया

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॥ पावन पाठ ॥

मेरी जीवन नैया डोल रही मेरी जीवन नैया,

ये तो साईं साईं बोल रही मेरी जीवन नैया ,

गेहरा सागर दूर किनारा साईं है तेरा ही सहारा,

भगतो को कष्टों से उभारा बाबा तू ही तारण हारा,

भेद न पाया कोई तुम्हारा हे जग के खिवैयाँ,

मेरी जीवन नैया डोल रही मेरी जीवन नैया,

मैं हु सेवक तुम हो मेरे स्वामी साईं मेरे अंतर यामी,

कोई नही है तुमसा दानी अमृत बाबा तेरी वाणी,

तुम चन्दन हो हम है पानी तुम ही शीतल छैयां,

मेरी जीवन नैया डोल रही मेरी जीवन नैया,

बाबा मुझको पार लगा दो इस वीरान की बिगड़ी बना दो ,

झूठा मन का भ्रम मिटा दो मन में ज्ञान की ज्योत जगा दो,

गीता का उपदेश सुना दो बन के कृष्ण कन्हियाँ,

मेरी जीवन नैया डोल रही मेरी जीवन नैया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।