ये मटकी टूट जावेगी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ये मटकी टूट जावेगी मात मेरी छोमे आवेगी,

मटकी और ले आऊ तने दिल जान दे जाऊ,

मने जो देर लगाई आज मेरा हो जाये भाई नाराज,

बाप ने मेरे शिखावे गी मात मेरी छोमे आवेगी,

ये मटकी टूट जावेगी मात मेरी छोमे आवेगी,

ये मटकी तार तले धर दे यार न सोच करा करदे,

बाप तेरे से न गबराऊ तने दिल जान दे जाऊ,

मटकी और ले आऊ तने दिल जान दे जाऊ,

जान दे जी गबरावे से क्यों घर में वार करावे से,

वे सो सो बात बनावेगी मात मेरी छोमे आवेगी,

ये मटकी टूट जावेगी मात मेरी छोमे आवेगी,

थारी क्तयों करे आज थकान मैं देखू कितने दिन का बात,

रोज मैं तेरे घर के गेडे लाऊ तने दिल जान दे जाऊ,

मटकी और ले आऊ तने दिल जान दे जाऊ,

मान जे नीरज कर ले गोर रे होजा चोदर दे के शोर,

घनी मने धमकावे गी मात मेरी छोमे आवेगी,

ये मटकी टूट जावेगी मात मेरी छोमे आवेगी,

यो ला रहा शिशरेआला आज कोलभिये का यो चेला,

मैं अपने साथ ले जाऊ तने रे दिल जान ले जाऊ

मटकी और ले आऊ तने दिल जान दे जाऊ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।