लाखों सर पे एहसान हैं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

लाखों सर पे ये एहसान हैं

चुकाना मुझ पे ना आसान है

दिलदार तू दिल खोल कर मुझपे यूँ मेहरबान है

कुछ तो है सरकार तेरी सरकारी में

यूँ ही झुकती नहीं दुनिया साड़ी ये

बना दी अनमोल उनकी ज़िन्दगी तूने

हुए थे जो नीलाम तेरी यारी में

कोड़ी में भाव था जिनका उनका अमीर में नाम है

दिलदार तू दिल खोल कर मुझपे यूँ मेहरबान है

लाखों सर पे ये एहसान हैं .........

पूजा जिसने सदा तेरी तस्वीर को

तूने दिया बदल उसकी तकदीर को

जिसकेतन मैं प्रभु तेरा वास हो

और क्या चाहिए उस शरीर को

दिल में रखते हैं जो आप को

उनकी तुझसे ही पहचान है

दिलदार तू दिल खोल कर मुझपे यूँ मेहरबान है

लाखों सर पे ये एहसान हैं .........

रोशन हो गयी रूह जबसे तेरे हुए

दूर जीवन से ये सब अँधेरे हुए

कैसे छायेगा मुझ पे गमो का साया

तेरी छाया है मुझको घेरे हुए

शर्मा गया संवर सांवरे तूने दिया जो वरदान है

दिलदार तू दिल खोल कर मुझपे यूँ मेहरबान है

लाखों सर पे ये एहसान हैं .........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।