केह दो न श्याम खा के मेरी कसम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

केह दो न श्याम खा के मेरी कसम,

खाटू में हो मेरा अगला जन्म,

केह दो न श्याम खा के मेरी कसम,

स्वर्ग और वैकुंठ दोनों याहा है

रहता कन्हिया मेरा जहा है,

हर पल है रेहना तेरी शरण,

केह दो न श्याम खा के मेरी कसम,

खाटू की गलियां रस्ते चोराहे,

जाती जाहा पर मेरी निगाहें,

देखे तुम्हे ही मेरे नैनं,

केह दो न श्याम खा के मेरी कसम

अरमान था जो तेरी सेवा का मन में ,

पूरा हुआ वो आज इस जगन में,

पल पल सताए मुझको ये गम,

केह दो न श्याम खा के मेरी कसम,

इतनी तमना कर दे तू पूरी,

सेवा करू गा एसी मैं तेरी

रखोगे खाटू में जन्मो जन्म,

केह दो न श्याम खा के मेरी कसम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।