मेरे सतगुरु ना मुझको भुलाना

स्वामी भुवनेश्वरी देवी जी महाराज
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॥ पावन पाठ ॥

मेरे सतगुरु ना मुझको भुलाना,

सेवक हूँ तेरा, नहीं हूँ बेगाना

बड़े भाग्य से मिल गया साथ तेरा,

हाथों में रखना प्रभु हाथ मेरा ।

छूटे ना जब तक मेरा आना जाना,

सेवक हूँ तेरा, नहीं हूँ बेगाना ॥

स्वांसो के धागे में सुरति पिरो दे,

जन्मो की मैली यह चादर है धो दे ।

पहन कर बने मेरा जीवन सुहाना,

सेवक हूँ तेरा, नहीं हूँ बेगाना ॥

मन में मेरे ज्ञान दीपक जगा दो

अभिमान मेरा उसी में जला दो ।

टूटे भरम का प्रभु ताना बाना,

सेवक हूँ तेरा, नहीं हूँ बेगाना ॥

दर पे खड़ा हूँ मैं बन के सवाली,

जन्मो से प्रभु जी झोली है खाली ।

कृपा कर बता दो छिपा जो खजाना,

सेवक हूँ तेरा, नहीं हूँ बेगाना ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।