तू सा स्वामी मैं हां दासी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

स्वामी मैं हां दासी भोले ओ मिंजो मेहल बनाई दे,

गोरा ते मेरी है आसा सन्यासी बलिये

कजो मेहल बानइये ,,

तू सा स्वामी मैं हां दासी

दुनिया ता तेरी भरा भरा रेह्न्दी भोले,

काजो असा पाडा ते रहिये,

तू सा स्वामी मैं हां दासी

गोरा ता मेरेए पहाड़ा रहना लिख्याँ ,

नि ओह रेहना मेहल चुबारे,

तू सा स्वामी मैं हां दासी

विश्वकर्मा बनाया सोने दा मेहल लंका संसाय्सी रहना,

तू सा स्वामी मैं हां दासी

रावन बामन मेहल दी पूजा कराई दखना लंका मंगी लई ऐ,

तू सा स्वामी मैं हां दासी

गोरा ता मेरिये चलिए केलासा

भलिये कर्मन मेहल चुबाये,

तू सा स्वामी मैं हां दासी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।