ॐ नम शिवाय भजले ले रे भजले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जब जब मन तेरा गबराए कोई राह नजर न आये ,

तब ध्यान मग्न हो भजता जा रे,

ॐ नम शिवाय भजले ले रे भजले,

चार दिनों का मेला है फिर चला चली का खेला है रे,

झूठ कपट शल की नगरी में प्राणी तू अकेला है,

जो तू पाप घटाना चाहे थोडा पुन्य कमाना चाहे

तो ध्यान मगन हो भजता जा रे,

मैं हो गई वनवारी श्यामा जी तेरे प्यार में,

डाल से पंशी उड़ जाता है रेट का टीला ढल जाता है,

तेरा मेरा कुछ भी नही बस आने जाने का नाता है,

दुःख दर्द जो तुझे सताए सुख शान्ति नजर ना आये ,

तो ध्यान मगन हो भजता जा रे,

मैं हो गई वनवारी श्यामा जी तेरे प्यार में,

रुपिया पैसा काम ना आये सोना चांदी काम ना आये,

काल का पंजा सिर पे पड़े तो मेहल मलियां काम ना आये,

शिव जी सारे कष्ट मिटाए,

शंकर सब को गले लगाये,

तू ध्यान मगन हो भजता जा रे,

मैं हो गई वनवारी श्यामा जी तेरे प्यार में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।