॥ पावन पाठ ॥
मुरलियां बाजे यमुना के तीर
मुरली सुनत मेरो मन हर लीन्हू,
चित्त धरत नहीं धीर
मुरलिया बाजे जमुना तीर
कारी कमरियाँ कारो कन्हियाँ
कारो जमुना को नीर
मुरलिया बाजे जमुना तीर
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर
चरण कमल पर शीश
मुरलिया बाजे जमुना तीर