इज्जता दी रोटी तू ख्वावी साइयां

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॥ पावन पाठ ॥

इज्जता दी रोटी तू ख्वावी साइयां,

किसे दा मोहताज न बनावी साइयां,

खैर सदा रेहमता दी पावी साइयां,

किसे दा मोहताज न बनावी साइयां,

दुनिया जहान विच एहो कुझ दबेया,

हसदे दे नाल एथे हर कोई हस्या,

रोंदेया नु इकला न रवावी साइयां,

किसे दा मोहताज न बनावी साइयां,

हक ते हलाल वाली रुखी सुखी चंगी है,

तेरे तो हमेशा अस्सा एहो मंग मंगी आ,

पाप दी कमाई तो बचावी साइयां,

किसे दा मोहताज न बनावी साइयां,

अपने पराये जेह्ड़े खुशियाँ दे साथी ने,

दुखा च लांबे ओही दिंदे दिन राती ने,

सुख दुःख विच तू निभाबी सैयां,

किसे दा मोहताज न बनावी साइयां,

जिन्दगी ये साहणु दिति इज्जता दी सैयां,

मौत भी तू सहनु देवी इज्ज्ता दी सैयां,

बेडी साड़ी साहिला ते लावी साइयाँ,

किसे दा मोहताज न बनावी साइयां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।