क्यों सुन्ना तेरा दरबार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ए की होया ए की होया क्यों सुन्ना तेरा दरबार नी माँ,

माँ सुन ले अरजा बच्चियां दी रो रो रहे पुकार नी माँ,

महिषासुर वरगे दानव तू इको वार च मुका दिते,

चण्डमुण्ड बलशाली वी तेरे अग्गे ने हार चुके,

अज एह कोरोना मदमस्त होया.........

इस दा वी कर संहार नी माँ

ए की होया ए की होया क्यों सुन्ना तेरा दरबार नी माँ

तू पालनहारी दुनिआ दी तू जगजननी कहलौंदी ए,

तू विपदा मेटे सबना दी जद चंडी रूप च औंदी ए,

अज विपता सब ते आन पई......

मेटो विपदा तू आन नी माँ

ए की होया ए की होया क्यों सुन्ना तेरा दरबार नी माँ

असी तेथों दूर माँ बैठे हाँ तू भावें साथों दूर नहीं,

इक तड़फ मिलन दी लग्गी है जे तैनू एह मंज़ूर नहीं,

ता मिटा दो दुखड़े दुनिआ दे .......

खोलो रस्ते इक बार नी माँ

ए की होया ए की होया क्यों सुन्ना तेरा दरबार नी माँ

असी भवन तेरे माँ आवा गे तैनू गल्लां बहुत सुनवागे,

जैकारे ला के मस्ती विच असी रौला बहुत ही पावा गे,

माँ मेहरां कर दो सबना ते........

फिर लग्गे रौनक दरबार नी माँ

ए की होया ए की होया क्यों सुन्ना तेरा दरबार नी माँ।

माँ सुन ले अरजा बच्चियां दी रो रो रहे पुकार नी माँ॥

अदिति शर्मा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।