अब तारो प्रभु जी सम्बालो प्रभु

पारंपरिक
श्री कृष्ण कथा कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अब तारो प्रभु जी सम्बालो प्रभु,

तुम संतो के भगतो के दासो के हो,

रखवारो प्रभु जी सम्बालो प्रभु

अब तारो प्रभु जी सम्बालो प्रभु,

टेर तुम ने प्रभु द्रोपती की सुनी

आज बिगड़ी हुई इक पल में बनी,

दीन दासो पे यु ही दया की सदा,

एक पाथी कथा ना जाती गिनी,

करो महिमा के सूरज का मन में मेरे ,

उजियारो प्रभु जी सम्बारो प्रभु,

अब तारो प्रभु जी सम्बालो प्रभु,

तुम्हे श्भरी के फल राम मीठे लगे,

भाग जन्मो जन्म के ये उसके जगे,

कोई छोटा बड़ा न प्रभु के लिए कोई दिल वाला दिल दे तो उसके सगे,

पास अनसु की पूंजी लिए हम खड़े,

है सवारों प्रभु जी स्म्बारो प्रभु,

अब तारो प्रभु जी सम्बालो प्रभु,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।