हिमत ना हारिये प्रभु न विसारिये

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हिमत ना हारिये प्रभु न विसारिये

हस्ते हसाते हुए जीवन गुजारिये,

हिमत ना हारिये प्रभु न विसारिये

सुख दुःख आये जाए पर समय नहीं रुक पाए,

शाम के बाद सवेरा फिर नई राह दिखाए

सच को स्वीकारिये प्रभु न विसारिये,

हस्ते हसाते हुए जीवन गुजारिये,

हिमत ना हारिये प्रभु न विसारिये

जितनी मिले सफलता लेकिन कभी एहम न करना,

असफलता कभी मिले तो प्रभु के प्रति वेहम न करना,

रिश्ते सवारिये प्रभु न विसारिये,

हस्ते हसाते हुए जीवन गुजारिये,

हिमत ना हारिये प्रभु न विसारिये

न चोट किसकी को पोंछे न दिल तू किसी का दिखाना,

जो हारा हुआ है मोहित उसका तू साथ निभाना,

नियत सुधारिये प्रभु न विसारिये,

हस्ते हसाते हुए जीवन गुजारिये,

हिमत ना हारिये प्रभु न विसारिये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।